मानों यह भी केह रहे हम दो और हमारे भी ही है,,, दो। वैसे भी अरावली की इस सर्वाधिक ऊंची चोटी पर, जहां पर पर्वतों की अनगिनत लम्बी पर्वत श्रृंखलाएं है। वहां पर पथ्तरों का भी एक परिवार यदि अपने आपको हैप्पी फैमेली कहें, तो हर्ज ही क्या है? भाई इन्हें भी अपने परिवार को बसाने का फर्ज है कि, नही?
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