New Elected Chairman Sunil Acharya in Action, Working Effectively Impressive.
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आज 12 जनवरी को स्वामी विवेकानन्द की 153वीं जयंती है। 12 जनवरी को देश युवा दिवस के रूप में भी मनाता है। यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद शिकागो धर्म सम्मेलन में जाने से पहले चार महीने तक माउंटआबू के गुफा में रुके थे। उन्होंने चंपा गुफा में तीन महीने तक तपस्या की थी। चंपा गुफा को अब स्वामी विवेकानंद स्मारक के रुप में विकसित करने की मांग हो रही है और नक्की झील के पास ही स्वामी विवेकानंद के नाम से एक बड़ा उद्यान भी है। माउंट आबू में नक्की झील के पास स्थित चंपा गुफा वह स्थान है जहां स्वामी विवेकानंद 1891 में चार महीने के लिए रहे। शिकागो जाने से पूर्व स्वामी विवेकानंद माउंट आबू आए थे और यहीं से उन्होंने अपने एक मित्र गोविंद सहाय को पत्र लिखकर मन की पीड़ा व्यक्त की थी कि मेरे देश का युवा सोया हुआ है मैं उसे जगाना चाहता हूं।
इतिहासकारों के मुताबिक चंपा गुफा में स्वामी विवेकानंद के अलावा स्वामी रामानंद ने भी तपस्या की थी। अब प्रशासन ने चंपा गुफा सहित तमाम उन स्थानों का विकसित करने का फैसला किया है जहां स्वामी विवेकानंद रहे थे। अब तक चर्चाओं और पहचान से दूर माउंट आबू स्थित चंपा गुफा शीघ्र ही स्वामी विवेकानंद स्मारक के तौर पर पूरी दुनिया में पहचानी जाएगी। अपने ओज और संदेशों से स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को जिस उर्जा से भरा उस अनंत उर्जा को अब युवा यहां महसूस कर सकेंगे। स्वामी विवेकांनद के इसी स्मृति के रूप में जहां नक्की झील पर स्वामी विवेकानंद उद्यान है वहीं माउन्ट आबू में गुजरात पर्वतारोहण संस्थान को स्वामी विवेकानंद संस्थान के रूप में जाना जाता है। उनकी तपस्या स्थली आज उनके यादों के उन चिन्हों को समेटे हुए है जिन पहाडियों पर विचरण करते हुए उन्होने कभी तपस्या की थी। विवेकानंद का जीवन बताता है कि कैसे बिना किसी साधन और सुविधा के सिर्फ एक संकल्प के बल पर युवा समाज की देश की सोच बदल सकते हैं।