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शहीद हुए जांबाज शहीदों की शहादत को मेरा सलाम: इकबाल खान

शहीद हुए जांबाज शहीदों की शहादत को मेरा सलाम: इकबाल खान

आतंकवाद और आतंकवादी शब्द ऐसी शख्सियत की और ईशारा करते है जिनका किसी धर्म-संप्रदाय से कोई लेना देना नहीं है | जिनका उद्धेश्य सिर्फ हिंसा फैलाना है| उनके बम-गौली से मरने वाले सभी धर्मो के लोग है | ऐसे आतंकवादी इंसानियत के दुश्मन है | इनसे लड़ते शहीद हुए जांबाज शहीदों की शहादत पर में कविता प्रस्तुतं करता हु |

“ हिमालय से ऊँचा “

हिमालय से ऊँचा है हमारे शहीदों का नाम, उनके घर वालो को ये पयाम (सन्देश ) धन्य है पैदा किये जिन्होंने ये लाल’ वतन की खातिर जन दी, उसका क्या मलाल, (दुःख ) वतन की आन के आगे सब कुछ फीका है, मेरे अन्दर भी क़ुरबानी का जज्बा जागा है, वक्त पड़ा तो कुछ न कुछ कर जाऊंगा, वतन के खातिर ही अपनी जान गवाऊंगा, सिखलाऊंगा यही अपनी औलादों को, कभी न मानना दुश्मन की चालों को, वतन पर कुर्बान होने में ही है रहमत है , ये सब ही हमारे लिए जन्नत है | जय हिन्द लेखक: इकबाल खान आबू पर्वत