New Elected Chairman Sunil Acharya in Action, Working Effectively Impressive.
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महिला कुली के रूप में कार्य करने के लिए मणि का आबू रोड के रेलवे स्टेशन पर आने की कहानी भी मजबूरी से ही शुरू होती है, जो आम गृहणियो के समकक्ष ही है। जो जीवन में अपने परिवार के पालन पोषण के लिए कुछ भी श्रम-परिश्रम से परहेज न कर आत्मसम्मान से जीवन जीती है। आबू रोड के गांधीनगर निवासी राजेन्द्र कुमार आबू रोड रेलवे स्टेशन पर कुली थे। परन्तु 35 वर्ष की उम्र में उनकी चार वर्ष पहले मौत हो गयी। उनकी पत्नी मणि देवी के एक बेटा तथा दो बेटिया है। पूरी तरह से पति पर निर्भर मणि देवी को खाने के लाले पड़ गये और वे घर में बर्तन साफ सफाई कर पेट पालने लगी परन्तु इतने से मुश्किल से गुजारा हो रहा था।
पिछले चार वर्षों तक दर दर भटकने के बाद जब यह बात नार्थ वेस्टर्न एम्प्लायज यूनियन संघ को पता चली तो उन्होंने मणि देवी को कुली बनाने का फैसला लिया और रेलवे प्रशासन से मिलकर उन्हें कुली का बैज दिला दिया जिससे वे अब आबू रोड रेलवे स्टेशन पर सामान्य कुलियों की तरह कुली का कार्य कर रही है और अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही है। उनका कहना है कि जब पुरुष यह कार्य कर सकते है तो महिलायें क्यों नहीं।
वीओः परन्तु जब पूरी घटनाक्रम के बारे में उनसे जानने की कोशिश की गयी तो उनकी आंखे डबडबा गयी। आसुओं के बीच बोली कि इसके अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं है। परन्तु उन्हें इस बात से खुशी है कि हमें प्रतिदिन काम मिलेगा और अपने बच्चों को पाल पोसकर बड़ा करुंगी तथा इन्हें योग्य बनाउंगी। इससे से वे प्रतिदिन दो सौ से तीन सौ रुपये कमा लेती है। जिससे वे किसी तरह अपने परिवार को चलायेंगी।
जहाॅं आबू रोड की ही नहीं बल्कि पूरे देश की महिलाओं में हर कार्य के लिए जज्बा और हिम्मत आयेगी वहीं रेलवे प्रशासन भी हर सम्भव मदद करने को तत्पर रहेगा