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पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जब भगवान शंकर ने पार्वती के शरीर के साथ तांडव शुरू किया था तो माता पार्वती के होठ यही गिरे थे। तभी से ये जगह अधर देवी (अधर मतलब होठ) यानी अधर देवी के नाम से प्रसिद्ध है। अर्बुदा देवी की पूजा छठे दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की होती है। अर्बुदा देवी मंदिर तक जाने के लिए 365 सीढ़ियों का रास्ता है । रास्ते में सुंदर नजारों की भरमार है। जिसकी वजह से सीढियां कब खत्म हो जाती हैं पता ही नही चलता। ऊपर पहुंचने के बाद यहां के सुंदर दृश्य और शान्ति मन मोह लेती है और सारी थकान पल भर में ही दूर हो जाती है ।
ऐसी पौराणिक मान्यता है कि नवरात्र के दिनों में माता के दर्शन मात्र से सभी दुखों से मुक्ति मिल जाती है,श्रद्धालुओं की मुराद पूरी हो जाती है। यही वजह है कि मां का दर्शन नवरात्र के मौके पर करने के लिए श्रद्धालुओँ की भारी भीड़ जमा होती है। माता अर्बुदा देवी का यहां चरण पादुका मंदिर भी स्थित है जो श्रद्धालुओं की आकर्षण का केंद्र होता है। यहां माता अर्बुदा देवी की पादुका है जिसके नीचे उन्होने बासकली राक्षस का संहार किया था। मां कात्यायनी के बासकली वध की कथा पुराणों में भी मिलती है।
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