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साथ ही यहां पर मां के होठ गिरने का वर्णन है। इसलिए मां कात्यायनी के रूप में नवरात्र की चतुर्दशी व छठ को यहां पर मां का विशेष श्रृंगार व दर्शन होते है। सिद्ध साधक पूरें नवरात्र में यहां पर आकर अपनी वाचा जिव्हा की सिद्धि के पूजन व तपस्या भी करते है। अष्टमी की रात्रि में महायज्ञ होता है,जो नवमी के सुबह तक पूर्ण होता है। वर्ष पर्यन्त यहां पर मां गुर्गा सप्तशती का पाठ आचार्य व ब्राह्मणों के द्वारा सुबह व शाम को किया जाता है। तो नवरात्रों में तो पूरें दिन व रात्रि में अखंड़ पाठ निरन्तर होता है।
राजपूत,परमार,आजंणा,जैन समाज के कुछ गौत्रों व चोधरी समाज के लोगों की कुल देवी है,मां अधर देवी ---
माउण्ट आबू की शक्ति पीठ में विराजित मां अधर देवी जहां पर मां के होठ गिरे थे,उसे प्रदेश के राजपूत,परमार,आजंणा,जैन समाज के कुछ गौत्रों समेत गुजरात के चोधरी समाज के लोगों ने अपनी कुल देवी माना और आज इन्हीं समाजों से सैकड़ों लोग यात्रा संघ के रूप में माउण्ट आबू में मां के दर्शन के लिए आते है। नवरात्र के दौरान तो इस स्थान पर यात्रा संघों का निरन्तर आवागमन बना सा रहता है। और माना जाता है कि यहां पर आने से दुखी लोगों की मां अंतकरण से पुकार सुनकर जल्द ही उनकी मनोकामना पूर्ण कर देती है। इसलिए मुख्यतया यह भी देखा जात रहा है। जल्द ही मनोकामना पूर्ण होने पर सैकड़ों श्रद्धालु एक दो माह के अंतराल में ही दुबारा पुन: मनोकामना पूर्ण होने पर मां के दरबार में उसका आभार व्यक्त करने के लिए आते है। राज्य से दूरस्थ स्थानों के लोग नवरात्र में तो अवश्य ही आते है।
News Courtesy: Kishan Vaswani