मोबाईल हैल्थ टीम की सजगता से बची मासूम तानिया की जान


| March 21, 2016 |  

आ रहा था लाखों का खर्च ,नि:शुल्क हुआ ईलाज, बिना ऑपरेशन स्वस्थ हुई बेबी
सिरोही । जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण कार्यक्रम राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 0 से 18 वर्ष की उम्र तक के बच्चों का उपचार किया जाता है,जिसमें आरबीएस के की मोबाइल हैल्थ टीम विभिन्न आंगनवाडी केन्द्रों पर जाकर लगभग 38 बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के उपचार में मदद करती है।

मोबाईल हैल्थ टीम बच्चों की जांच कर उस अनुरूप की जाने वाली चिकित्सा हेतु बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र , जिला अस्पताल या फिर मेडिकल कोलेज रेफर करती है . वहां इन बच्चों का निशुल्क उपचार किया जाता है। वहीं आरबीएस के कार्यक्रम के अंतर्गत सिरोही जिले के रामपुरा गाँव की 6 वर्षीय बालिका बेबी तानिया का उपचार किया गया। ये केस सामान्य से कुछ हटकर था , क्योंकि बालिका तानिया को बचपन से ही ह्रदय में छेद की समस्या थी ।

आरबीएस के मोबाईल हैल्थ टीम को इस बात का पता तब लगा, जब वो रामपुरा गाँव के आंगनवाड केंद्र में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर रही थी। बेबी तानिया के माता पिता से पूछने पर आरबीएस के मोबाईल हैल्थ टीम को पता लगा कि बच्ची को बचपन से ही सर्दी जुकाम की शिकायत रहती थी । लगातार समस्या बने रहने पर जब अभिभावक उसे लेकर चिकित्सकों के पास ले गए तो जांच करने पर बेबी तानिया के ह्रदय में छेद की समस्या का पता लगा. चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि इस रोग की वजह से ही बच्ची को लगातार सर्दी जुकाम बना रहता है . साथ ही उन्होंने दवाइयों और इलाज में 02 लाख का खर्च बताया.

जब रामपुरा आंगनवाडी केंद्र में आरबीएस के मोबाईल हैल्थ टीम ने बच्ची का निरीक्षण किया और हर संभव मदद और इलाज करवाने का आश्वासन दिया, तब बेबी तानिया के पिता का हौसला बंधा और नई उम्मीद जगी। टीम ने तुरंत बेबी तानिया का रेफर कार्ड बनाया और उदयपुर के गीतांजलि अस्पताल रेफर कर दिया। गीतांजली अस्पताल के चिकित्सकों ने बेबी तानिया के ह्रदय की गहनता से जांच की और पाया कि बालिका को बिलकुल ठीक समय पर रेफर किया गया है ।

बेबी सानिया को भरती कर इलाज प्रारंभ कर दिया गया , उसे निशुल्क दवाईया उपलब्ध करवाई गई और चिकित्सकों का निर्णय सही साबित हुआ । बेबी सोनिया एक माह के उपचार के बाद आज पूरी तरह स्वस्थ है और अब उसे ऑपरेशन करवाने की आवश्यकता भी नहीं है , ये सब संभव हुआ चिकित्सा विभाग के अभिनव राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के भगीरथ प्रयासों और आरबीएस के मोबाइल हैल्थ टीम की सजगता की वजह से।

हरीश दवे, सिरोही

 

 

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