टोल नाके का ठेका आबू वासियों के हितों पर कुठाराघात : देवासी


| July 1, 2017 |  

माउण्ट आबु। नगर पालिका मण्डल द्वारा टोल नाके को ठेका पद्वति पर देने का फैसला माउन्ट आबू के स्थानीय निवासियों पर कुठाराघात है व आबू वासियों पर अन्याय है। यह बात आज पत्रकारों को विधान सभा के पूर्व उप मुख्य सचेतक, पूर्व विधायक व आबू विकास समिति के पूर्व सदस्य रतन देवासी ने बताई।

देवासी ने बताया कि आबू पर्यटन नगरी के अलावा धार्मिक व शिक्षा की नगरी के रूप में भी जानी जाती है। यहां भारी तादाद में धार्मिक श्रद्भालु के साथ ही देश व विदेश से हजारों की संख्या में शिक्षा ग्रहण करने विधार्थी आते है। ऐसी स्तिथि में यात्री कर नाके को ठेके पर देना गलत है। इससे न केवल आबू वासियों को नुकसान पहुंचेगा बल्कि भ्रष्टाचार बडें पैमाने पर शुरू हो जाएगा।

देवासी ने बताया कि हमें उस इतिहास में जाना पडे़गा कि वर्षो पूर्व यह टोल नाका क्यों लगाया गया था। उसके बाद भी जब भी इसका कर बढ़ाया जाता है तो उसका मकसद होता है आबू का विकास इस आमदनी से व वन विभाग के माध्यम से भी विकास करना।
देवासी ने बताया कि अगर सभी आमदनी वाली सम्पतियों को ठेके पर देना है तो फिर विकास कार्य हेतु आबू में आबू विकास प्राधिकरण का गठन हो जाना चाहिए।

नाका ठेके पर जाने से जहां भ्रष्टाचार बढ़ेगा वही राज्य के लोग विशेष कर जिले के आदिवासी जो धार्मिक दृष्टि से आते है, जिनका बड़ा मेला भी होता है उनको बहुत नुकसान होगा। देवासी ने बताया की

– इससे आबु वासियों के हित जो आज संरक्षित है, को बाद में ठेकेदारों कि तानाशाही का सामना करना पड़ेगा।
– वैसे भी आबू का आम नागरिक समस्याओं के पहाड़ का सामना कर रहा है।
– जोनल मास्टर प्लान के लागू होते ही नगरपालिका ने अगर विवादित जगह को रोक, स्वीकृतियां देना शुरू किया होता तो आज आबू वासीयों को काफी सहूलियत होती। मगर सिर्फ स्थानीय कूछ नेताओं के ईगो के सारी क्रेडिट उन्हें मिल को लेकर विलम्ब हुआ व आज मामला दहज में चला गया ।

देवासी ने बताया कि नाके का ठेका बड़े ठेकेदारों का रचाया खेल है। अगर ऐसा होगा तो विरोध के साथ अनशन भी करेंगे व जरूरत पड़ी तो कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे।

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